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जादुई जड़ी बूटी – हिंदी कहानी | Magic Herbs – Hindi Story

कहानी :- जादुई जड़ी बूटी

जादुई जड़ी बूटी
                       बहुत पुरानी यह कहानी है एक गांव में भरत नाम का एक गरीब आदमी रहता था उसकी पत्नी के गुजरने के बाद वह अपने बेटे रामलाल के साथ अकेले रहता था भरत जंगल में जाता सूखी लकड़ियां तोड़ता और उसे बाजार में बेचता और अपना पेट पालता था |
1 दिन की बात है जब भरत जंगल जाने के लिए घर से रवाना हुआ तब उसे चक्कर आकर वह गिर गया फिर उसके बेटे रामलाल ने उसे उठाया और पलंग के ऊपर सुला दिया अब भरत को लकवा हो गया था भरत आप बिस्तर के ऊपर से भी उठ नहीं पाता था |
रामलाल ने बहुत सारे डॉक्टर वेद राज को बुलाया बहुत सी जड़ी बूटी भी खिलाई फिर भी भरत का इलाज नहीं हुआ रामलाल से अपने पिता भरत की यह हालत देखी नहीं जा रही थी
रामलाल : – अब अपने पिता की यह हालत बुरी देखकर रामलाल एक संत के पास गया और फिर बोला संत जी कृपया मेरी मदद कीजिए |
संत :-  तभी संत बोले क्या हुआ बेटा तुम इतनी दुखी क्यों हो |
रामलाल :- फिर रामलाल बोला संत जी मेरी मां गुजर गई है अब मेरे पिताजी की भी हालत अच्छी नहीं है दिन पर दिन उनकी हालत खराब होती जा रही है मैंने बहुत इलाज करवाया फिर भी मेरे पिताजी का सही इलाज नहीं हुआ अगर उनको कुछ हो गया तो मैं अनाथ हो जाऊंगा यह बात संत को कहते-कहते रामलाल  रोने लगा |
संत :- तभी संत ने कहा अगर तुम अपने पिताजी को ठीक करना चाहते हो तो तुम्हें पश्चिम दिशा में एक जंगल है |तुम्हें उस जंगल में जाना है और उसमें से एक जड़ी बूटी लानी है उस जड़ी बूटी से तुम्हारे पिताजी ठीक हो जाएंगे तभी रामलाल ने पूछा क्या सच में ठीक हो जाएंगे | तभी संत जी बोले हां परंतु जड़ी बूटी लाना इतना आसान नहीं है उस जंगल से क्योंकि उस जंगल में एक भयानक राक्षस रहता है और वह राक्षस तुम्हें कुछ  पहेलियां पूछेगा अगर तूने उस पहेलीयो का सही सही जवाब दे दिया तो वह तुम्हें जड़ी-बूटी दे देगा | ऐसी बात सुनकर रामलाल पश्चिम दिशा की ओर चल पड़ा | वह जंगल सच में डरावना वह भयानक था |आगे चलते-चलते रामलाल को वह राक्षस दिखाई दे दिया रामलाल उस राक्षस के पास गया और बोला हो रक्षक जी क्या आपके पास वह जादुई जड़ी बूटी है क्या वह मुझे दे सकते हैं मेरे पिताजी बहुत बीमार है|
राक्षस :- तभी राक्षस बोला है बच्चे मैं तुम्हारी हिम्मत की तारीफ करता हूं  तुम अकेले मेरे पास आ गए अगर तुमने मेरे 3 पहेलियों के जवाब दिए तो मैं तुम्हें जड़ी बूटियां दे दूंगा बोलो तुम तैयार हो | तभी रामलाल बोला हां मैं तैयार हूं मैं अपने पिताजी के लिए कुछ भी कर सकता हूं तुम पूछो मेरे को पहेलियां | तब राक्षस ने पहली पहेली पूछी
( बिल्ली के आगे दो बिल्ली बिल्ली के पीछे दो बिल्ली बताओ कुल कितनी बिल्ली ) रामलाल ने कुछ देर सोचा और बाद में उत्तर दिया (तीन बिल्ली) तभी राक्षस ने उत्तर दिया बहुत सही सही उत्तर दिया तूने बाद में राक्षस ने दूसरी पहेली बोली | ( मैंने 20 को काट दिया ना मैंने खून किया ना मैंने कानून हाथ में लिया ऐसा मैंने क्या किया) रामलाल सोच कर उत्तर दिया (नाखून काटे) फिर राक्षस हंसने लगा और फिर बोला एकदम सही उत्तर और फिर राक्षस बोला अब मैं तुम्हें आखिरी पहेली पूछ रहा हूं और आखरी पहेली पूछी ( ऐसी कौन सी चीज है जो ठंडी होने पर काली गर्म होने पर लाल फेंकने पर सफेद हो जाती है ) रामलाल सोच में पड़ गया और राक्षस हंसने लग गया फिर रामलाल ने सोचकर बताया (कोयला)  फिर राक्षस बोला एकदम सही उत्तर दिए और तूने मुझे खुश कर दिया तुम अपने पिता का सच्चा बेटा है मुझे और बाद में राक्षस उसे जड़ी-बूटी दे देता है जड़ी बूटी लेने के बाद रामलाल ने राक्षस को धन्यवाद बोला और वहां से चल दिया | घर जाकर रामलाल ने जड़ी-बूटी अपने पिता को खिलाई और रामलाल के पिता भरत एकदम सही हो गए |
कहानी का शीर्षक है की जितना सके उतना अपनी माता-पिता की सेवा करें

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