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हिंदी कहानी 16 – लालची ठग कहानी – Dark FF

कहानी :- लालची ठग 

बहुत पुरानी बात है एक गांव में बुधराम नाम का एक दूधवाला आदमी रहता था | बुधराम के पास बहुत सारी भैंसें थी | और वह उन्हें बहुत प्यार करता था | भैंस का दूध वह गांव-गांव घूमकर बेचता था और बुधराम का गांव में बहुत सम्मान था | क्योंकि वह दिल का अच्छा था और सरल व्यवहार का था | 

दूध में पानी नहीं मिलता था | इसी वजह से उसके धीरे-धीरे ग्राहक बढ़ने लगे |एक दिन की बात है कि बुधराम से एक आदमी ने दूध मांगा | अरे बुधराम भैया क्या मुझे दूध मिलेगा |

बुधराम :- माफ करना भैया दूध तो खत्म हो गया | गांव में सभी लोग सोचते थे कि बुधराम से ही दूध ले| तभी बुधराम ने सोचा कि क्यों ना मैं एक और भैंस खरीद लूं |ऐसा सोचकर बुधराम दूसरे दिन बाजार पहुंचा | 

तबले वाला :- जब बुधराम बाजार पहुंचा तो भैंस खरीदने भैंस के तबेले में गया तो तबेले वाले आदमी ने बोला अरे कैसे हो बुधराम भैया तब ?

बुधराम :- बुधराम ने  जवाब दिया अच्छा हूं मैं| तभी बुधराम ने पूछा आप कैसे हो भैया आप बताओ |

तबेले वाला :- मैं बढ़िया हूं बताओ बुधराम भैया आज कैसे आना हुआ | 

बुधराम :- जी भैया दूध के ग्राहक बढ़ रहे हैं तो मुझे दूध बेचना पूरा नहीं पड़ रहा तो इसीलिए सोचा एक और भैंस खरीद लूं |

तबेले वाला :- देखो इनमें से कौन सी भैंस पसंद है |

रामू :- रामू ने सभी भैंस देखी और एक भैंस पसंद की बोला मुझे इनमें से एक भैंस पसंद है | उस भैंस का नाम क्या है मेरे को बताओ ना |

तबेले वाला :- बड़े पारकु नजर कू हो बुधराम भैया | इतने पैसों में से वही सबसे अच्छी भैंस है सबसे ज्यादा वही दूध देती है इस भैंस का नाम है पारो | 

बुधराम उस पारो भैंस को खरीद लेता है उसे लेकर वह घर की तरफ चल देता है उसे घर जाने के लिए एक जंगल से गुजरना पड़ता था | बुधराम भैंस को लेकर उस जंगल से गुजर रहा था |तभी एक आदमी सामने से हाथ में लाठी लिए हुए बुधराम के पास आकर खड़ा हो गया | 

आदमी :- हों दूधवाले रुको !

बुधराम :- अरे भैया आपको कैसे पता मैं दूध बेचता हूं |

आदमी :- अरे मूर्ख तू दूध वाला नहीं है तो इस भैंस का क्या अचार डालेगा | चल भैंस मेरे हवाले कर यहां से दफा हो | नहीं से लाठी से इतना मारूंगा कि तेरे को पहचान भी नहीं पाएंगे | 

बुधराम डर गया और वह सोच में पड़ गया |

आदमी :-अरे जल्दी कर मूर्ख मेरे पास टाइम नहीं है | भैंस मुझे दे दे | 

 बुधराम डर गया और भैंस उस आदमी को दे दी |

बुधराम का यह शांत स्वभाव देखकर वह आदमी प्रभावित हुआ और हंसने लगा यह बुधराम तो डरपोक निकला मुझे भैंस दे दी |

बुधराम :- भैया लाठी से मार खाने से अच्छा है भैंस ही दे दो | 

आदमी :-अरे भाग यहां से नहीं गया तो मार पड़ेगी तेरे को|  

बुधराम :- बुधराम थोड़ा सोच कर बोला भैया थोड़ा रुको ना | मैंने मेरी भैंस आपको दे दी मैं खाली हाथ मेरे घर जाऊंगा तो मेरी पत्नी मुझे बहुत मारेगी | अरे यह लाठी मुझे दे देते तो बड़ा आसान होता | और उस आदमी ने हंसकर लाठी दे दी और रामू ने लाठी चल कर ले ली | लाठी लेकर उस आदमी को बुधराम ने कहा मेरी भैंस मेरे को वापस वह दे दो नहीं तो मैं तेरा सर फोड़ दूंगा | उस आदमी को अपनी मूर्खता पर बहुत पछतावा हुआ जिस लाठी से उसने बुधराम से भैंस ली थी वह लाठी अब बुधराम के पास जा चुकी थी | और मैं चुपचाप आदमी बुधराम के हाथ में भैंस की रस्सी थंबा देता है | 

आदमी :- आदमी ने कहा यह लो तुम्हारी भैंस अब मुझे मेरी लाठी वापस कर दो |

रामू सोच कर बोलता है अगर मैंने इसको लाठी वापस दे दी तो यह फिर से मेरे से भैंस वापस ले लेगा |

रामू :- रामू उसे जवाब देता है कौन सी लाठी भागो यहां से नहीं तो मैं तेरा सर फोड़ दूंगा | 

वह आदमी वहां से डर कर भाग जाता है | 

मित्रों इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है जिसकी लाठी उसकी भैंस |

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