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उड़ता हुआ सोने का घोड़ा – हिंदी कहानी | Flying Gold Horse – Hindi Story

कहानी :- उड़ता हुआ सोने का घोड़ा

मगध देश का परिपालन नरेश वर्मा नाम का राजा किया करता था | उन्होंने अपनी अंतिम अवस्था में अपने बेटे को बुलाकर कहा |
राजा नरेश वर्मा :- विकास वर्मा मेरे बेटे मेरे बाद इस राज्य का परिपालन अच्छी तरह से करना मेरे जाने से पहले तुम्हें एक रहस्य बताना है हमारे किले के एक कोने में उड़ता हुआ घोड़ा उसे एक ऋषि ने मुझे दिया था पर उसे खतरा है क्योंकि कोई भी उस घोड़े पर चढ़ता है | तो वह उड़ जाता है जब वह वापस आता है तू जो उस घोड़े पर आदमी चढ़ता है वह वापस नहीं आता है | हमारे कई सैनिक इसी तरह गायब हो चुके हैं इसलिए तुम मुझे वादा करो कभी उस घोड़े पर सवार नहीं होगे बाद में विकास वर्मा ने वादा किया |
कई समय बाद विकास वर्मा के पिताजी का देहांत हो गया  | बाद में  विकास वर्मा महाराज बन गए |
रामपुर नाम के गांव में सुरेश नाम का युवक रा करता था | एक दिन वह अपने खेत में खुदाई कर रहा तो उसे सोने का एक चाबी मिला | गांव में एक दिन ढिंढोरा पीटा सुनो सुनो महाराज के पास जो घोड़ा है उसका कोई सवारी कर सकता है | अगर किसी ने उस घोड़े की सवारी कर दी तो युवरानी से उसका विवाह करवाया जाएगा | अगर कोई दुर्घटना हुई तो महराज इसके जिम्मेदार नहीं होंगे |
उधर किले के बाहर महाराज ने एक व्यक्ति से कहा |
 
महाराज :- देखो महाशय अगर तुम इस घोड़े की सवारी करते हो अगर तुम्हें कुछ भी हो गया तो इससे मेरा कोई संबंध नहीं होगा |  इसके पहले जिन्होंने भी सवारी की थी पता नहीं वह कहां है अगर आप अपनी मर्जी से सवारी करना चाहते हो तो ठीक है कोई जबरदस्ती नहीं |
युवक :- तभी युवक ने कहा हां महाराज में सारी बातें जान कर आया हूं महाराज में सवारी करना चाहता हूं |
जैसे ही वह युवक घोड़े पर बैठा घोड़ा हवा में उड़ने लगा | फिर आसमान में उड़ते उड़ते घोड़ा बादलों में विलीन हो गया फिर अचानक से घोड़े ने दोनों पैर सामने से उठाए बाद में वह युवक घोड़े के पीट से नीचे गिर गया |
कुछ समय बाद घोड़ा  उड़ते-उड़ते किले में वापस आ गया | इतने में सुरेश वहां पर पहुंचा |
महामंत्री :- उसे देखकर महामंत्री ने सुरेश से का क्या महाशय है आप भी घोड़े की सवारी करोगे आज तक 40 लोग लापता हो गए हैं | अब तुम चले जाओ महाराज अब बहुत हुआ जैसे आपके पिता श्री ने कहा था इस घोड़े को कक्ष में बंद रखना ही ठीक है मेरी बात मानिए |
 
सुरेश :- तभी सुरेश बोलता है महाराज मुझे एक मौका दीजिए उसके बाद आप चाहो तो घोड़े को कक्ष में बंद कर दीजिएगा मुझे एक मौका दे दीजिए महाराज |
महाराज :- बाद में महाराज ने कहा तुम तो बहुत जिद्दी हो | चलो ठीक है अगर तुम्हें खुद अपने प्राण त्यागना है तो मैं क्या कर सकता हूं |
बाद में जैसे ही सुरेश घोड़े पर बैठा वह हवा में उड़ गया और बादलों के पार उड़ने लगा | फिर अचानक घोड़े ने सामने से दोनों पैर उठाए और झटके मारे  इससे सुरेश थोड़ा घबरा गया | तभी उसकी नजर घोड़े के गर्दन पर पड़ी वहां पर एक चाबी लगाने का निशान दिखा | तभी सुरेश ने सोचा यह घोड़ा इस तरह बर्ताव क्यों कर रहा है घोड़े पर सवार सारे लोग कहां गायब हो रहे हैं और घोड़े के गर्दन पर यह निशान कैसा |
बाद में सुरेश ने जो खेत में खुदाई के समय चाबी मिली वह चाबी अपनी जेब से निकाली और बोलने लगा शायद इस चाबी और घोड़े में संबंध है | यह सोचकर उसने चाबी उस छेद में डाला और चाबी को घुमाया और वह बाद में घोड़ा शांत होकर उड़ने लगा | बाद में घोड़ा बोला हे कोई मानव मुनीश्वर ने जो चाबी दिया था वह महाराज के पिता से कहीं खो गया था | उस मुनि का यह आज्ञा थी जो इस चाबी का मालिक होगा उसी की बात मैं मान लूंगा इसीलिए मैंने कई लोगों को नीचे गिराया पर तुमने और चाबी को खोज निकाला इस कारण मैं आज के बाद तुम्हारी बात मान कर चलूंगा बताओ मुझे क्या करना होगा |
इसके बाद सुरेश घोड़े पर सवार होकर किले में वापस आ गया | और महाराज को सारी बात बता दी |
महाराज :- शब्बास सुरेश शब्बास जो चाबी मेरे पिताजी से गुम हो गया तुमने उसे खोज निकाला इस घोड़े को अब हम अच्छे कामों के लिए इस्तेमाल करेंगे मैं तुम्हारा बहुत आभारी हूं आभारी हूं |
बाद में सुरेश और युवरानी की शादी हो गई और बाद में सुरेश एक अच्छा राजा बना |
इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि हमेशा हमें सतर्क रहना चाहिए हम सतर्क नहीं रहे तो हमें बहुत नुकसान हो सकता है |

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