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किस्मतवाला नारियल – हिंदी कहानी | Kismatwala Coconut – Hindi Story

कहानी :- किस्मतवाला नारियल

रामपुर नाम का बड़ा ही सुंदर एक गांव था | यह गांव सुख के और आरएनआरएल के लिए बहुत ही बड़ा प्रसिद्ध गांव था | इसी गांव में एक छोटा व्यापारी घनश्याम इसी गांव में नारियल का ठेला लगाता था |
 घनश्याम भगवान के सामने हाथ जोड़कर बोलता है भगवान की लीला अपरंमपार है | इस रोग जैसे गांव में मुझे जन्म दिया यहां पर तो सचमुच शांति है घनश्याम का नारियल बेचने का एक ठेला था | उसी गांव में घनश्याम नारियल बेचकर अपना घर चलाता और गुजारा करता था | नारियल ले लो नारियल ले लो मीठे मीठे मलाईदार नारियल ले लो भगवान के चरणों में चढ़ाने के लिए नारियल ले लो इसी तरह घनश्याम का हर दिन की तरह कारोबार चलता था |
एक दिन की बात है घनश्याम को एक रोने की आवाज आती है | घनश्याम बोलता है रे यह क्या कौन रो रहा है तभी नारियल के अंदर से आवाज आती है यार देखो मानव मैं बोल रहा हूं | घनश्याम हेरान होकर सुनने लगा |
घनश्याम :- घनश्याम नारियल से बोलता है बोलो क्या बात है क्यों रो रहे हो |
 
नारियल :- तुम बहुत दिनों से मुझे ठेले पर रखे हो मुझे बेचते भी नहीं काटते भी नहीं यह क्या बात है |
घनश्याम :- घनश्याम नारियल को बोलता है मैंने जब दरअसल तुम्हें पेड़ से निकाला तो तभी तुम मुझे अजीब लगे | मैंने तुझे जब से पहले पर रखा है तब से मेरी कमाई बहुत अच्छी होती है यही कारण है |
नारियल :- पर मानव मुझे तो हरदम यह डर लगा रहता है कि तुम कभी भी मुझ काट सकते हो | यहां तो मुझे कोई भक्त किसी दिन पत्थर पटगे गा |
घनश्याम :– डरो मत ऐसा कुछ नहीं होगा |
 
 

नारियल :– ठीक है मानव पर सृष्टि का नियम है कि जो भी इस दुनिया में आया है आखिरकार उसे दुनिया छोड़कर जाना भी पड़ेगा | और मैं इस ठेले में रहकर सड़ना नहीं चाहता | मुझे मुक्ति दे दो मनुष्य |

घनश्याम के दिल को यह बात छु के चली जाती है | और घनश्याम रात भर सोचता रहता है |  और दूसरे दिन सुबह उठकर ठेले पर आता है और और उस नारियल को उठाता है |
 
 
नारियल :- नारियल घनश्याम को बोलता है कि क्या तुम मुझे आज खाने वाले हो |
घनश्याम :– नहीं बिल्कुल नहीं |
घनश्याम उस नारियल को भगवान के मंदिर में लेकर चला जाता है एक पानी से भरे छोटे से घड़े के ऊपर रख देता है और कहता है ?‌
 
 

घनश्याम :- मेरे फायदे से ज्यादा तुम्हारा भगवान के चरणों में रहना जरूरी है इतना कहकर घनश्याम आके चला जाता है |

कुछ ही दिन बाद घड़े पर रहते रहते नारियल पर अंकुर आ जाते हैं और वह नारियल एक छोटा सा पेड़ बन जाता है | उस मंदिर में जो पंडित है वह घनश्याम से बोलता है तुम्हारे रखे नारियल पर पौधा उगा है | इसे अपने घर पर  ले जाकर जमीन के अंदर लगा दो आगे चलकर यह नारियल का पौधा तुम्हें बहुत सारे नारियल देगा | घनश्याम उस नारियल को घर पर लेकर जाता है और गड्ढा बनाकर पेड़ उसमें लगा देता है |
कुछ सालों के बाद वह पेड़ बहुत बड़ा हो जाता है अचानक गहरी नींद में सोए हुए घनश्याम को आवाज सुनाई देती है | घनश्याम उठो घनश्याम बाद में घनश्याम अपनी आंखें खोलता है और बाहर आता है और देखता है वहीं पेड़ उसे आवाज दे रहा है |

 
घनश्याम :- बोलो भाई अब मैं तुम्हारी क्या सेवा करूं |
नारियल :- घनश्याम तुमने मेरी किस्मत बदल दी अब तुम्हारी बारी है |
कुछ दिन बाद उस नारियल के पेड़ पर बहुत सारे नारियल लग जाते हैं | इतने नारियल लगते हैं कि गिनती करना भी बहुत ही मुश्किल था |
 
 

घनश्याम :– घनश्याम नारियल को बोलता है सचमुच दोस्त अच्छाई का कर्जा तुमसे चुकाना सीखे कोई भी एक अकेली बगीचे का नारियल इस पेड़ पर है | धन्यवाद तुम्हारा दोस्त इतना कहकर घनश्याम नारियल ठेले पर लेकर बाजार में बेचने जाता है |

इसी तरह घनश्याम का काम चलता रहा और वह एक बड़ा व्यापारी बन जाता है | और हर दिन उस नारियल के पौधे की मनोभाव से पूजा करता है  |
तुम मित्रों इस कहानी से यह शिक्षा मिली अच्छा कर्म करो अच्छा फल मिलेगा |

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