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अनपढ़ बहु – हिंदी कहानी | Illiterate Bahu – Hindi Story

कहानी :- अनपढ़ बहु

कानपुर गांव में सुमन नाम की औरत अपने दो बेटे राहुल और राम के साथ रहती थी और उन दोनों की शादी हो चुकी थी | सुमन की बड़ी बहू प्रिया बहुत पढ़ी लिखी थी | लेकिन उसकी छोटी बहू रिया ने कोई पढ़ाई नहीं की थी |
प्रिया रिया को हमेशा ताना मारते रहती थी और उसे उसको अनपढ़ होने का एहसास दिलाती रहती |
प्रिया :- प्रिया रिया से कहती है कि रिया कल मेरी कुछ दोस्त आएगी घर पर |
 
 
रिया :- रिया प्रिया से कहती है अच्छा भाभी तो क्या तैयारी करूं आप बोलो उनके लिए |
प्रिया :- हां मुझे बाजार से सामान भी मंगवाना है एक काम करती हूं मंगवा लेती हूं |
रिया :- भाभी आप मंगवावो मत मैं लेकर आ जाती हूं बाजार से आप मुझे बता दीजिए क्या क्या सामान लाना है |
प्रिया :– अरे आजकल तो मोबाइल से जो चीज लानी हो वह आ जाती है | क्या रिया तुम्हें इतना भी नहीं पता ?
रिया :- नहीं भाभी आप सीखाओ गी तो मैं सीख जाऊंगी |
प्रिया :- प्रिया रिया से कहती है चिढ़ाते हुए तुमने पढ़ाई लिखाई तो कि नहीं यह सब क्या सीखोगी तुम छोड़ो यह कहकर चली गई और यह बात सुनकर बहुत उदास हो गई |
रिया बेचारी पार्टी की तैयारी में लग गई अगले दिन प्रिया की सहेलियां उसके घर आती है पार्टी चल रही है और प्रिया रिया बेचारी को जानबूझकर अपनी पढ़ी-लिखी सहेलियों से इंग्लिश मैं बातें करने के लिए बोल रही है |
प्रिया :- प्रिया इंग्लिश में बोलती है रीटा से यह रिया है यह मेरे पति के भाई की पत्नी है |
 
कविता :–  हाय रिया तुम कैसी हो यह बात कविता इंग्लिश में बात करती है रिया से !
रिया को कविता की बात यह इंग्लिश में समझ में नहीं आती | पर फिर भी वह बात करने की कोशिश करती हूं
रिया :- रिया हकलाते हुए बोलती है मैं अच्छी हूं तुम कैसी हो ?
कविता :–  कविता बोलती है मैं तो अच्छी हूं और वह इंग्लिश में और ज्यादा बात करने लगती है |
रिया :- रिया मना कर देती है मुझे माफ कीजिए मुझे अंग्रेजी भाषा नहीं आती |
 
 

कविता :- मुझे माफ कर दो मुझे पता नहीं था रिया |

प्रिया को रिया की बेज्जती देखकर बहुत हंसी आ रही थी | पर रिया को बहुत ही शर्मिंदगी महसूस होती है | और मैं वहां से चली जाती है और वह किचन में जाकर बहुत ही उदास खड़ी रहती है तभी उसकी सास सुमन आती है |
सुमन :- क्या हुआ बहु वह रिया से पूछती है तुम इतनी उदास क्यों खड़ी है |
 
 
रिया :- कुछ नहीं मम्मी जी वो प्रिया भाभी की पार्टी चल रही है ना बाहर मुझे समझ में नहीं आ रहा किस से क्या बात करूं |
सुमन :– अरे बाबू इसमें समझ में आने वाली क्या बात है चलो हम दोनों चाहते हैं इससे तुम्हें बुरा भी नहीं लगेगा |

रिया :– रिया अपने साथ सुमन को रोकती है नहीं मम्मी जी मैं नहीं जाऊंगी प्रिया भाभी को शर्मिंदा होना पड़ेगा मेरी वजह से यह कहकर रिया वहां से चली जाती है |

इतने में प्रिया और राहुल के बीच झगड़ा हो जाता है
राहुल :- राहुल प्रिया को डांटते हुए कहता है तूने आज इतना सारा खर्चा कर दिया प्रिया और उसके बाद तुम्हें फिर पैसे चाहिए |
 
प्रिया :- प्रिया गुस्से से राहुल को कहती है देखो मुझे ताने मारने की जरूरत नहीं है मैं नौकरी करती हूं समझे वह तो मेरे पैसे खत्म हो गए हैं इसीलिए तुमसे मांग रही हो |
राहुल :- ओ तो वह कौन से पैसे तुम्हारे काम आए | घर पर तुम देखती भी नहीं हो एक भी पैसा पता नहीं कहां खर्च करती हो तुमसे अच्छी तो रिया है | कम से कम तो वह राम का इतना खर्चा तो नहीं कराती |
प्रिया और राहुल इतने जोर जोर से बोल रहे हैं आप और झगड़ रहे हैं उनकी आवाज बाहर तक आ रही थी और बाहर रिया साफ सफाई कर रही थी |
प्रिया :– राहुल के मुंह से रिया की बात सुनते ही प्रिया गुस्से में बोलने लगी मैं रिया की तरह अनपढ़ तो नहीं हूं आज के जमाने की में पड़ी हुई लड़की हूं मेरी तुलना उससे मत करो |
रिया को यह सुनकर बहुत रोना आ जाता है वह रोते-रोते अपने कमरे में चली जाती है | 1 दिन सुमन और सुमन की दोनों बहुएं घर पर होती है |
 
 

सुमन :- बहुत दिन हुए हैं पकोड़े खाए हुए आज अपनी दोनों बहुओं को अपने हाथ से पकोड़े बना कर खिलाती हूं | सुमन जैसे ही पकोड़े तेल में डालती है तो तेल थोड़ा सा सुमन के हाथ पर गिर जाता है | और सुमन जोर से चिल्लाने लगती है | तभी प्रिया और रिया दोनों रसोई में आ जाते हैं प्रिया को समझ में नहीं आता कि क्या करें | पर रिया जल्दी से फ्रीज से ठंडा पानी निकालती है अपनी सास सुमन के हाथ पर डालने लगती है |

रिया :- मम्मी जी अपने हाथ को सीधा रखिए मैं पानी डाल रही हूं ?
प्रिया :- इतने में प्रिया बोलती है अरे यह क्या कर रही हो तुम |
इतने मे रिया बोलती है इससे मम्मी जी के हाथ में छाले नहीं पड़ेंगे | और आप जल्दी से डॉक्टर को फोन लगाइए बाद में प्रिया बोलती है हां लगाती हूं |प्रिया डॉक्टर को फोन करती है और बाद में डॉक्टर घर पर आ जाता है |
डॉक्टर सुमन के हाथ पर दवाई लगाते हैं और दवाई थोड़ी बहुत लिखकर  देते हैं | यह दवाई आप लेकर आ जाएगा अभी  |
 
 
रिया :- तभी रिया बोलती है जी डॉक्टर साहब | और बाद में बोलती है आपकी फीस कितनी है डॉक्टर साहब |
डॉक्टर :- दो हजार |
सुमन :- तभी सुमन बोलती है मेरे पास तो अभी इतने पैसे नहीं है | इतने में सुमन के पास में खड़ी अपनी बहु प्रिया से पूछती है तुम्हारे पास है क्या पैसे |
 
 

प्रिया :- नहीं मम्मी जी मेरे पास थे खत्म हो गए वह एटीएम में है लेकिन मैं एटीएम से निकाल कर लेकर आती हूं और बाद में डॉक्टर से बोलती हैं आप दस मिनट रुक जाइए ना प्लीज |

इतने मे रिया पैसे दे देती है यह लो डॉक्टर साहब मेरे पास है | और डॉक्टर साहब पैसे लेकर चले जाते हैं | और बाद में रिया के पास और पैसे होते हैं वह प्रिया को दे देती है और कहती है यह लीजिए भाभी आप मम्मी जी की और भी दवाई लेकर आ जाइएगा |

 
सुमन :- सुमन रिया से बोलते अरे तुम्हारे पास इतने सारे पैसे थे क्या ?
रिया :- हां मम्मी जी यह पैसे मैंने घर के खर्चे से बचाए थे |
 
 

सुमन :- वह रिया से कहती है बेटा आज तो तूने संभाल लिया | नहीं तो अब तक तो मेरे हाथ में छाले पड़ जाते |भले ही तुमने पढ़ाई लिखाई नहीं किया पर तुम बहुत समझदार हो |

रिया ने जिस तरह अपने सास सुमन को संभाला पास में खड़ी प्रिया बहुत शर्मिंदा होती है और उसे एहसास हो जा आता है कि इंसान को उसकी पढ़ाई लिखाई से नहीं बल्कि उसकी समझदारी से आंख ना चाहिए |

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