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चोर और अमीर – हिंदी कहानी | Chor Aur Amir – Hindi Story

कहानी :- चोर और अमीर
 
रामपुर नाम के गांव में कमलेश नाम का एक महाजन रहा करता था वह लोगों से बहुत ज्यादा ब्याज वसूल किया करता था और तंग किया करता था अगर किसी को ब्याज देने में देरी हो जाती तो उसे बहुत सारी गालियां देता और डांट देता था |
कमलेश महाजन :- 1 दिन कमलेश ने किसी से का क्यों भाई रामलाल मेरी उधारी चुकाने के बारे में कितनी बार पूछो अरे इतने बेशर्म हो गए हो | कपड़े इस्त्री करके खूब पैसे कमाते हो | यह मुंह और मसूर की दाल बेशर्म कहीं का छी छी |
महाजन की यह बात सुनकर रामलाल को बहुत दुख हुआ |और वहां से चला गया |
 उसी गांव में सुखराम नाम का एक छोटा किसान रहता था | उसने खेती-बाड़ी के काम के लिए कमलेश से कुछ उधारी ली हुई थी | 1 दिन सारे गांव वालों के सामने कमलेश ने कहा |
 
कमलेश महाजन :- क्यों भाई सुखराम कब लिए थे तुमने उधार सिर्फ गया जमा करने से हो जाएगा क्या असल कब दोगे खाना वाना खाते हो कि घास खाते हो छी छी छी |
सुखराम :- सुखराम ने कहा कमलेश जी सबके सामने ऐसे बेइज्जत करना ठीक नहीं जल्दी आपके उधर ही चुका दूंगा जरूरत पड़े तो मेरा खेत बेचकर सही जरूर आपकी उधर ही चुका दूंगा |
कमलेश महाजन :- ऐसे तो कई बार बोल चुके हो अरे गुस्सा तो नाक पर चढ़ा रहता है | अरे क्या भेजोगे क्या नहीं उससे मेरे को क्या करना एक मां बाप के पैदावार हो तो तुम मेरी उधारी झुका कर दिखाओ|
कमलेश महाजन की बातों से सुखराम बेइज्जत महसूस किया | उसने सोचा किसी तरह इसकी उधारी चुकानी ही पड़ेगी | उसने अपनी बीवी के गाहने बाजार के सेट चमनलाल के पास उधारी पर रखें और उससे कहा ?
सुखराम :- सेठ जी जल्दी मैं अपनी बीवी के गहने छुड़ा लूंगा आपने मेरी मदद की धन्यवाद |
पैसे लेकर वह गांव के बस के पास आ ही रहा था | मां पर दो व्यक्ति बातचीत कर रहे थे | इस बस में चोरी करने का यही सबसे बढ़िया मौका है | हमें सुनसान जगह ढूंढनी चाहिए और इस बस पर हमला कर देना चाहिए| मैं तो चोरी चकारी छोड़ने की सोच रहा हूं दूसरे ने कहा आज जो चोरी में पैसे मिलेंगे उससे मेरी बेटी की शादी करवा दूंगा |उसके बाद कोई कुली का काम कर लूंगा | ऊपर वाले की दया हुई तो फिर से चोरी करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी |
इस तरह बातचीत करते हुए वह दोनों वहां से चले गए | कुछ देर बाद बस गांव की ओर चल पड़ी | कमलेश महाजन ने देखा कि उसके बाजू में सुखराम बैठा हुआ था |
कमलेश महाजन :- क्यों सुखराम कोई काम से आए हुए थे यहां की इतना कहकर वह बस में जोर जोर से बोलने लगा अरे सभी लोग सुनो जरा यह बहुत ही पागल इंसान है इसने मुझ से उधारी ली अब शहर में घूम रहा है और मजे लूट रहा है इस तरह दरिंदे को कभी देखा है आप लोगों ने |
कमलेश की बातें सुनकर सभी बस के लोग आवाक हो गए |तभी सुखराम ने कहा ?
 
सुखराम :- सेठ जी आपके उधर ही के काम से ही मैं बाजार आया था |  सुखराम सभी बस वालों को बोलता है देखो मैं अभी इसकी उधारी चुका रहा हूं आप सब गवाह हैं | यह कहकर उसने पैसे कमलेश को दे दिए| पैसे मिलने से कमलेश बहुत आश्चर्यचकित हुआ |
इतने में ही रास्ते में बड़े-बड़े पत्थर पड़े थे तो बस रुक गई | पेड़ के पीछे से चोर हाथ में लाठी लेकर दौड़ के आ रहे थे | उन सब को देखकर ड्राइवर जोर से चिल्लाया चोर चोर भाग जाओ भाग जाओ यह कहते-कहते तब तक चोरों ने पूरी बस को घेर लिया |
चोर :- एक चोर ने का अपना भला चाहते हो तो सबके पास कितने कितने पैसे है बता दो नहीं तो मार डालेंगे सबको किसी ने कहा साहब कमलेश महाजन के पास बहुत पैसे हैं बाकियों के ऊपर कृपया करके जाने दीजिए | चोरों ने कमलेश माध्यम से पैसे छीन लिए और वहां से चले गए |
सुखराम की उधारी भी चूक गई और चोर की बेटी की शादी भी हो गई यह बात सुनकर सुखराम बहुत खुश हुआ |
तो मित्रों इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है अपने आप पर काबू करो पैसो का घमंड ना करो वैसे तो हाथ का मेल है यह कभी भी कमाया जा सकता और कभी भी खोया जा सकता है |

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