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जादुई दिया – हिन्दी कहानी | Magical Diya – Hindi Story

कहानी:- जादुई दिया

 

जादुई दिया =

कई वर्षों पहले की बात है एक गांव में एक आदमी अपनी पत्नी और अपने बेटे के साथ रहता था वह बहुत गरीब थे वह आदमी जंगल में जाता पूरे दिन मेहनत करता और जंगल में सूखी लकड़ियों को तोड़ता और बाजार में बेचता था |

वो खुद गरीब था परंतु वह दिल से अमीर था वह पेड़ को काटते काटते अगर पेड़ सुखा नहीं आता तो वह उस पेड़ को छोड़ देता था | और वह 1 दिन रोज की तरह सूखी लकड़ी ही काट रहा था तभी उसके पास एक साधु आया |

साधु :- आदमी के पास साधु जाकर बोला बेटा मैं जंगल में भटक गया हूं और मैं इस जंगल में अकेला हूं क्या तुम मुझे पानी पिला सकते हो तभी वह आदमी बोला क्यों नहीं साधु जी अभी पिलाता हूं और आदमी ने एक छोटे से लोटे में पानी लाया और साधु को दे दिया साधु ने पेट भर के पानी पिया और पानी पीने के बाद साधु ने उस आदमी को धन्यवाद बोला|और साधु जब उस आदमी की तरफ देखे तो वह आदमी बहुत उदास था और साधु ने पूछा क्या हुआ बेटा तुम इतने उदास क्यों हो | तभी उस आदमी ने साधु से बोला मैं बहुत गरीब हूं मैं जंगल से सूखी लकड़ियां तोड़कर बाजार में बेचता हु लेकिन इससे मेरे घर का गुजारा नहीं होता | साधु को बात समझ में आ गई और साधु ने कुछ चमत्कार किया और साधु के हाथ में दिया प्रकट हुआ और वह दिया साधु ने उस आदमी को हाथ में देते वे का यह लो बेटा दिया तभी वह आदमी बोला यह तो सिर्फ दिया है इसलिए से मैं क्या करू |तभी साधु ने कहा बेटा यह कोई मामूली दिया नहीं है यह जादुई दिया है  , तभी आदमी चौक कर बोला जादुई दिया तभी साधु ने कहा हां जादुई दिया इसे जला कर तुम जो चाहे वह ले सकते हो अपने मन की इच्छा पूरी कर सकते हो और वह इतना कहते ही साधु ने दिया उस आदमी के हाथ में दे दिया वह आदमी जादुई दिया लेकर घर आ जाता है|

आदमी जैसे ही घर पहुंचा अपनी पत्नी को आज दिया भागवान सुनती हो मुझे यह क्या मिला| तभी उस आदमी की पत्नी बोली क्या वहां क्यों चिल्ला रहे हो |तभी वह आदमी अपनी पत्नी को बोलता है यह देखो जादुई दिया तभी उसकी पत्नी बोलती है तुम्हारा दिमाग ठीक तो है  आदमी बोलता है हां देखना चाहती हो इसका कमाल |तभी उस आदमी की पत्नी बोलती है तो मुझे भूख लगी है मंगाओ कुछ खाने के लिए आदमी दिया जलाता है और खाने की मांग करता है वजह से ही खाने की मांग करता है तो उसके सामने खाना आ जाता है और आदमी बोलता है देखो लिया दिये का कमाल  | आदमी को दिया अपनी पत्नी को देखकर बोलता है अब जो तुम्हें चाहिए वह इसलिए से मांग लो और आदमी दूसरे दिन जंगल में लकड़ी काटने चला जाता है |

आदमी के जंगल जाने के बाद उसकी पत्नी और उसका बेटा दिए को जलाते हैं और बहुत सारा मांग लेते हैं बड़ा सा घर टेबल कुर्सियां| शाम होते ही वह आदमी घर वापस आता है  और आदमी चौक कर बोलता है यह क्या मेरा घर है मेरा तो घर छोटा सा है तभी उस आदमी की पत्नी दरवाजे पर खड़ी थी और बोली हां यह हमारा घर है और वह घर के अंदर चले जाते हैं धीरे-धीरे उन्होंने उस दिए से सारी जरूरत थी चीजें हासिल कर ली |

कुछ दिन बाद एक साथ दो उनके घर पर आता है और बोलता है सुनो बेटी मुझे थोड़ा सा पानी पिला दो प्यास लगी है और वह आदमी अपने घर के अंदर से बोलता है कौन बेशर्म है जो पानी मांग रहा है पत्नी बोलती है पता नहीं कोई भिकारी लग रहा है उस पत्नी का पति घर के अंदर से बोलते हैं भगाओ इसे घर से सभी पत्नी बोलती है चले जाओ यहां से यहां पर पानी नहीं मिलेगा| ओ पत्नी ऐसा बोल कर दरवाजा बंद कर देती है और वह साधु वहां से चला जाता है | और इसके बाद उस आदमी के बेटे को बहुत भूख लगती है और उसकी पत्नी उसने को जलाती है और वह खाना मांगती है परंतु इस बार उसको खाना नहीं मिलता और वह दिया बुझ जाता है और वह पत्नी अपने पति को बोलती है अरे इसलिए को क्या हुआ यह काम क्यों नहीं कर रहा तभी वह आदमी आता है और अपने हाथ से दिया जलाता है  परंतु वह जलकर वापस से बुझ जाता है तभी उसे याद आता है जो दरवाजे पर जो साधु आया था उसने मेरे को वह दिया दिया था और वह आदमी फिर से भागा भागा जंगल की ओर जाता है | और वह चिल्लाता है साधु जी साधु जी रुको रुको साधु जी रुक जाते हैं और वह आदमी साधु के सामने हाथ जोड़कर खड़ा हो जाता है और बोलता है मेरे से बहुत बड़ी गलती हो गई मुझे माफ कर दो मेरे पत्नी को पता नहीं था आप कृपया करके मेरे घर पर चलें मैं आपको पानी पिलाता हूं इसके बाद साधु जी बोलते हैं नहीं बेटा अब इसका कोई फायदा नहीं तुम अच्छे आदमी थे तभी वह दिया तुम्हारा साथ दे रहा था अब वह दिया तुम्हारे कुछ काम का नहीं | तुम्हारे पास धन आते ही तुम्हारे अंदर की इंसानियत खत्म हो गई  ऐसा कहते ही साधु जंगल की ओर आगे बढ़ जाते हैं और वह आदमी उधर बैठकर बहुत रोता है इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि अपनी इंसानियत कभी नहीं भूलनी चाहिए |

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