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चींटी और गुप्त खाना – हिंदी कहानी | Ant and Secret Food – Hindi Story

कहानी :-चींटी और गुप्त खाना

अलसी टिंडे :-

एक समय की बात है गर्मी का मौसम था और रहते थे एक टिंडे का एक झुंड | हल्की गर्मी ताजी हवा और हरे घास में खुश रहा करते थे उनका अच्छा मैं चलता था |

एक दिन जब टिड्डे खेल रहे थे तब उन्होंने कुछ फलों और सब्जियों को चलते हुए देखा | टिड्डे इन को देखकर हैरान रह गए टिड्डे के नेताओं को उन सब्जियों के पास से आवाज सुने दे रही थी| थोड़ा पास जाकर उन्होंने देखा कि वह कुछ चीटियां थी जो फल और सब्जियों को अपने सिर पर लेकर जा रहे थे सारा खाना लेकर अपने चिट्ठी घरों में डाल रहे थे |

टिंडा नेता :- तुम सब यह खाना लेकर अपने बिल में क्यों डाल रहे हो |

चिटी :- सर्दी का मौसम आने वाला है उसकी तैयारी कर रहे हैं जो गर्मी में मिलता है वह सर्दी में कहा होता फल सब्जियां यह सब नहीं मिलेंगे और बहुत ठंड होगी बाहर निकलना मुश्किल होगा | इसीलिए हम अभी मेहनत करके सब कुछ थोड़ा जमा कर लेते हैं |

टिड्डा नेता :- हंसकर टिड्डा नेता बोला हां बेशक चीटियों को ऐसी ही सर दर्द ही उठानी पड़ती है देखो कितनी छोटी और कमजोर हो  हम लंबे और बलवान हैं हमें तो किसी भी चीज की चिंता भी नहीं है यह बात टिड्डा नेता ने घमंड से चिटी को बोला | यह बोलकर टिड्डे चीटियों पर हंसने लगे |

हर रोज चिड़िया अपना खाना ले जाते रहे और उस उनके ऊपर टीडे हंसते रहे | इसी प्रकार कुछ दिन बीत गए और इतने में ही गर्मी का मौसम खत्म होने को आ रहा था |

एक दिन की बात है टीडे रोज की तरह खाना खा कर आराम कर रहे थे गर्मी के मौसम में खा खाकर सभी आलसी और मोटे बन गए | आखिरकार ठंड का मौसम आ गया | आलसी टिडे के पास रहने के लिए कुछ भी नहीं था उनके पास न तो पत्ते ना कोई झाड़ी ना कोई खाने को कुछ भी नहीं न रहने के लिए घर | तभी उनको याद आया चीटियों ने अपना घर बनाया है और बहुत सारा खाना भी क्या किया है और वह सभी वहां चले गए और वहां पर कब्जा करके वहां पर बस गए |

अब सारी चीटियां परेशान हो गई और अलग-अलग बिखर गई चीटियों ने समूह बनाए और ठंड से बचने के लिए अपने दोस्त के घरों में चले गए |

ठंड का मौसम खत्म हो गया और अब फिर से गर्मी शुरू हो गई चीटियां फिर से खाना इंक्कटा करने  में लग गई |सभी चीटियों ने फैसला लिया इस बार उन टिड्डे अपने घर और भोजन पर कब्जा करने नहीं देंगे | टिड्डे को गुमराह करने के लिए उनके पास थी एक योजना | इस योजना के अनुसार कुछ चीटियों ने एक गुप्त जगह बनाई | आदि चीटियां नए जगह पर खाना जमा कर रही थी और आधी चीटियां पुराने जगह पर खाना इंक्कटा करने का नाटक कर रही थी | क्योंकि इससे टिड्डे का ध्यान हट जाए |

टिंडे आराम से चीटियों को देखकर सोच रहे थे कि अब फिर से सर्दी में उनके खाने पर कब्जा कर लेंगे |

अब दोबारा आ गया ठंड का मौसम टिंडे फिर से अब उस बिल में घुस गए अंदर जाकर उन्होंने देखा तो अंदर कुछ नहीं था | दिल के अंदर कुछ डालें कुछ पत्ते यह देखकर टिड्डे परेशान हो गए | और बाहर थी तेज ठंड इस कारण वे बिल से बाहर नहीं निकल पाए | ठंडी का मौसम अब उनको उसी बिल में बिताना पड़ा | अब बस उन तीन चार पत्तों को खा कर उन्हें जीवित रहना पड़ा | अब तीनों को एहसास हुआ कि अब उनको अपनी आलस की सजा मिल रही थी | जब एक गर्मी में बाहर निकले तो वह दुबले पतले कमजोर पड़ गए | कुछ पत्तों फल को खाकर अपनी सेहत का ध्यान रखा | पूरी तरह से सही होने पर टिडो ने अपना खाना जमाना शुरू कर दिया | सर्दी निकालने के लिए उन्होंने सब ने मिलकर पत्तों और झाड़ियों को ईक्कटा किया | आलसी टिडे जो एक समय में लापरवाह थे अब वे चीटियों की तरह मेहनती और बलवान बन गए |

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि अपना काम सच्चाई और ईमानदारी से करना चाहिए क्योंकि आलस हमें बर्बाद कर देगा |

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