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मेहनत का फल – हिंदी कहानी | Fruits of Hard Work – Hindi Story

  •  कहानी:- मेहनत का फल
  • एक बार की बात है बीसलपुर नाम के एक गांव में दो दोस्त रहा करते थे | एक का नाम राजेश और दूसरे का नाम सुरेश था दोनों बेरोजगार थे |
  • एक दिन की बात है वाह दोनों अपने गुरु जी के पास गए और गुरु जी को अपनी सारी परेशानी बताई | दोनों ने गुरुजी से कहा हमें कुछ पैसे उधार दीजिए जिससे हम कुछ काम या कोई धंधा शुरु कर सके |
  • दोनों ने जब यह बात गुरुजी से स कई तो गुरुजी ने दोनों को एक-एक हजार रुपए दे दिए | पैसे देते वक्त गुरुजी ने का तुम दोनों को यह पैसे एक साल के अंदर मुझे वापस करने होंगे |
  • दोनों ने गुरुजी की बात मान ली बाद में दोनो वहा से पैसे लेकर चले गए | रास्ते में दोनों जा रहे थे जाते-जाते सुरेश ने कहा ?
  • सुरेश :- हम दोनों इन पैसों से कोई अच्छा काम शुरु करेंगे |
  • राजेश ने सुरेश की बात नहीं मानी कहा की मैं अब कुछ दिन अच्छी जगह पर घूमने जाऊंगा मौज करुंगा सभी पैसे मौज मस्ती में लगा दूंगा |
  • 1 साल बीत जाने के बाद जब गुरुजी के पैसे देने की बात आई तो दोनों गुरुजी के पास चले गए |
  • गुरुजी :- गुरुजी ने पहले राजेश से पूछा तूने पैसों का क्या किया पैसे लौटाने के लिए रकम लाए |
  • राजेश :- राजेश ने मुंह लटका कर जवाब दिया गुरुजी किसी ने मेरे पैसे धोखे से लूट लिए |
  • गुरुजी :- बाद में गुरुजी ने सुरेश से पूछा तुम भी खाली हाथ आए हो क्या ?
  • सुरेश :- सुरेश ने मुस्कुराकर जवाब दिया ” नहीं गुरु जी , यह लीजिए आपके एक हजार रुपए और अतिरिक्त हजार रुपए और लीजिए |
  • गुरुजी :- गुरुजी ने सुरेश पूछा तुम इतने रुपए कैसे कमा लाए क्या तुमने किसी को धोखा दिया है |
  • सुरेश :- जी नहीं गुरु जी मैंने तो अपनी सूझबूझ और मेहनत से रुपए कमाए हैं एक भी पैसा किसी से नहीं लिया है ना ही किसी के साथ धोखा किया है | मैंने यह पैसे एक किसान को परेशान देखकर मैंने उसके सारे फल खरीद लिए फिर मैंने उन सारे फलों को बाजार में जाकर बेच दिया इसके बाद वह आदमी मुझे हमेशा हमेशा फल ला कर देता और उन्हें मैं बाजार में जाकर बेच देता था | कुछ दिनों के बाद मैंने बाजार में दुकान ले ली और फलों का कारोबार शुरू कर दिया |
  • यह सब बात सुरेश ने गुरु जी को बताकर मदद करने के लिए धन्यवाद दिया और अतिरिक्त रुपए किसी जरूरतमंद को देने के लिए रखने का आग्रह किया |
  • गुरुजी सुरेश से बहुत खुश हुए उन्होंने राजेश से कहा ”अगर तुम भी समझदारी तथा मैन अच्छे काम करते तो सुरेश की तरह सफल हो जाते |”
  • सुरेश :- अभी सुरेश ने का अभी भी कुछ बिगड़ा नहीं है समय का सम्मान करो और मैं मेहनत करो मेहनत का मैं महत्व समझो सफलता तुम्हारे कदम चूमेगी |
  • राजेश ने उन पैसों से मौज की इस बात का उसे अभी बहुत बुरा लगा और वह अब समझ गया कि मेहनत किए बिना पैसा नहीं मिलेगा इसलिए वह समझदारी से अपना काम शुरू कर दिया |
  • दोस्तों इस कहानी चाहिए शिक्षा मिलती है समय का सम्मान करो श्रम का महत्व  समझो सफलता कदम चूमेगी |

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